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अथ गण्ड नक्षत्राणि

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★★★अथ गण्ड नक्षत्राणि★★★  √●  गण्ड नक्षत्र संख्या में ६ हैं। गण्ड मात्र ३ हैं।  √★१. अश्विनी (मेष राशि का प्रारंभ विन्दु)। √★ २. रेवती (मीन राशि का अंतिम भाग)। √★ ३. आश्लेषा (कर्क राशि का अंतिम छोर ।  √★४. मघा (सिंह राशि का आरंभ विन्दु) । √★ ५. ज्येष्ठा (वृश्चिक राशि का अंतिम खण्ड)। √★ ६. मूल (धनु राशि का आद्य विन्दु)। √●● गण्ड का अर्थ है- दोष, छिद्र, धब्बा, दरार, द्वार, संधि, ग्रंथि, गाँठ, व्यथ, फोड़ा, पिटकी, गड्ढा, मडार, अन्धकूप । √● जीवन में ३ गण्ड हैं-युवान, प्रौढ और जीर्ण। जब युवावस्था का आगमन होता है तो कुमार के मुख पर दाढ़ी और मूंछ के कोमल रोम खिलने लगते हैं। गुह्यास्थान में भी ऐसा होता है। शिश्न में उत्तेजना विकसित होती है। इस परिवर्तन से कुमार का चित्त क्षुब्ध हो उठता है। कुमारी में भी ऐसा होता है। उसमें वक्षांकुर फूटते हैं, आर्तव का होना देखा जाता है, लज्जा और संकोच आता है। कुमारी का मन डाँवाडोल होता है। ऐसी दशा में कुमार/कुमारी का सम्हलना वा सम्हालना कठिन होता है। यह प्रथमगंड है। ज युवावस्था का अन्त होता है, प्रौढ़वस्था का आगमन होता है तो केश क...